आरती श्री गायत्री जी की, माता जी की।
आरती श्री गायत्री जी की॥
ॐ भूर्भुवः स्वः, तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि, धियो यो नः प्रचोदयात्॥
ब्रह्मवादिनी, वेद माता, जयति जय गायत्री माता।
तुम ही हो माँ सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती, काली॥
आरती श्री गायत्री जी की...
हंसारूढा श्वेतवसना, पुस्तक पुष्प धारिणी।
वीणा हस्त विराजित, जयति जय जय माँ भवानी॥
आरती श्री गायत्री जी की...
तुम ही हो माँ ब्रह्म शक्ति, ज्ञान की ज्योति जलाती।
सकल सृष्टि की तुम हो जननी, पालक, पोषक, संहारिणी॥
आरती श्री गायत्री जी की...
सत, रज, तम, त्रिगुण धारिणी, तुम ही हो माँ जगदम्बे।
भक्तों की दुःख हर्ता, जयति जय जय माँ अम्बे॥
आरती श्री गायत्री जी की...
जो कोई तुमको ध्यावे, सो नर तर जावे।
मिले उसे माँ आत्मज्ञान, सुख संपत्ति घर आवे॥
आरती श्री गायत्री जी की, माता जी की।
आरती श्री गायत्री जी की॥