Mata ke Das
Mata ke das ke liye ek vishal sangrah. Navratri aur anya aavsar ke liye bhakti se bhare das yahan paayen.
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Mata ke das ke liye ek vishal sangrah. Navratri aur anya aavsar ke liye bhakti se bhare das yahan paayen.
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"पधारो म्हारी माता, अब घट में विराजो । भगत थारा आया, अब किरपा बरसाओ ॥ तो हु बैजानु सरत मय सुरत कर । पन सवरु रे घर वोसो ज्ञाने बताय ॥ तो हु बैजानु हरी..."
"काहे का थारा धान पकावत । काहे री का बल भजे री माँ ॥ अगर चंदन का धान पकावत । बावन का बल भजे री माँ ॥ काहे री थारी गोवली री माँ, काहे चाक पुराय । कोई ..."
"बाई के आया पाहुना रे दिल्ली शहर का । कवर के आया पाहुना रे हतनापुर का ॥ तो हूँ बैजानू… सरत माय सुरत कर । पन सवरू रे घर वो सो ज्ञाने बताए ॥ बाई के आया ..."
"भवन में थारी सेवा करूंगा म्हारी अबला । मारग से म्हारा लारे चालजो री म्हारी दुर्गा ॥ तो हूँ बैजानू… सारत माय सूरत कर । पण सवरू रे घर वो सो ज्ञाने बताए..."
"करतारे पांडु होम आग्यारी सेवा करता । करतारे हिवड़ा होम आग्यारी अर्जुन करता ॥ ये है रे होम आग्यारी सेवा करता, अच्छा होम रचाय । रचाया हे…sss ॥ नारे सार..."