हे माँ दुर्गे सरणागत हूँ, तेरी शरण में आया हूँ।
जग जननी जग पालनी, तुझसे ही सब पाया हूँ॥
अम्बे तू है जगदम्बे काली, सरस्वती भवानी।
महालक्ष्मी का रूप है तेरा, तू शक्ति की रानी॥
हे माँ दुर्गे सरणागत हूँ...
शेरों वाली माता रानी, खड्ग त्रिशूल धारी।
दुष्टों का संहार करने वाली, भक्तों की रखवारी॥
हे माँ दुर्गे सरणागत हूँ...
नवरात्रि में आती माता, भक्तों के घर आती।
मनोकामना पूर्ण करके, खुशियाँ बरसाती॥
हे माँ दुर्गे सरणागत हूँ...
जय माता दी, जय माता दी, जय अम्बे गौरी।
पूर्ण करो मेरी मनोकामना, हे जगत की छोरी॥
हे माँ दुर्गे सरणागत हूँ, तेरी शरण में आया हूँ।
जग जननी जग पालनी, तुझसे ही सब पाया हूँ॥