गणेश चतुर्थी 2026

गणेश चतुर्थी 2026: घर पर कैसे करें बाप्पा की संपूर्ण पूजा मांडणी?

शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और शास्त्रोक्त विधि

14 सितंबर, 2026
12 मिनट पढ़ने का समय

गणेश चतुर्थी 2026: बाप्पा के स्वागत की तैयारी

गणेश चतुर्थी सनातन धर्म और विशेषकर महाराष्ट्र के सबसे पवित्र और उत्साहपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस पावन दिन विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का घर में स्वागत कर उनकी स्थापना और पूजा की जाती है।

इस वर्ष 14 सितंबर 2026, सोमवार को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। अगर आप भी अपने घर में गणपति बाप्पा की स्थापना करने जा रहे हैं, तो पूजा की सही मांडणी और विधि जानना बहुत उपयोगी रहेगा।

इस गाइड में आपको शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, पारंपरिक मराठी मांडणी और चरण-दर-चरण पूजा विधि आसान भाषा में मिलेगी।

गणपति बाप्पा की पूजा और स्थापना

गणपति बाप्पा की पूजा और स्थापना

गणेश चतुर्थी 2026: महत्वपूर्ण तिथियां और शुभ मुहूर्त

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मुख्य मध्याह्न पूजा मुहूर्त — मुंबई
14 सितंबर 2026, सुबह 11:20 बजे से दोपहर 01:48 बजे तक

गणपति स्थापना और मुख्य पूजा के लिए मध्याह्न समय। शहर के अनुसार समय अलग हो सकता है।

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चंद्र दर्शन निषेध
14 सितंबर 2026, सुबह 10:39 बजे से रात 08:43 बजे तक

दिए गए पंचांग समय के अनुसार इस अवधि में चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा है।

चतुर्थी तिथि प्रारंभ
13 सितंबर 2026, रात 09:36 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त
14 सितंबर 2026, रात 10:14 बजे

📍 प्रमुख शहरों में गणेश पूजा मुहूर्त

मुंबई11:20 AM – 01:48 PM
पुणे11:16 AM – 01:44 PM
नई दिल्ली11:02 AM – 01:31 PM
चेन्नई10:51 AM – 01:18 PM
जयपुर11:08 AM – 01:36 PM
हैदराबाद10:58 AM – 01:25 PM
गुरुग्राम11:03 AM – 01:31 PM
चंडीगढ़11:04 AM – 01:33 PM
कोलकाता10:18 AM – 12:46 PM
बेंगलुरु11:02 AM – 01:28 PM
अहमदाबाद11:21 AM – 01:49 PM
नोएडा11:02 AM – 01:30 PM

नोट: ऊपर दिए गए शहरों के मुहूर्त संबंधित शहर के स्थानीय समय के अनुसार हैं। आपके शहर के अनुसार पूजा का समय कुछ मिनट अलग हो सकता है।

💡 जरूरी बात: गणपति स्थापना और मुख्य पूजा के लिए मध्याह्न मुहूर्त को प्राथमिकता दी जाती है। यदि किसी कारण से बताए गए मुहूर्त में पूजा करना संभव न हो, तो अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दिन में पूजा कर सकते हैं। संभव हो तो अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय को प्राथमिकता दें।

Source: गणेश चतुर्थी 2026 के पूजा मुहूर्त और पंचांग संबंधी समय के लिए Drik Panchang का संदर्भ लिया गया है।

पूजा शुरू करने से पहले यह जरूर तैयार रखें

पूजा स्थल और चौरंग साफ कर लें
रांगोळी और लाल / कोरा वस्त्र तैयार रखें
कलश और नारियल पहले से तैयार रखें
दूर्वा, जास्वंद और पत्री अलग रखें
विडा साहित्य एक थाली में सजाएं
21 मोदक और नैवेद्य तैयार रखें
दीपक, तेल, घी, कपूर और माचिस रखें
घंटी और शंख पूजा स्थल पर रखें
गणेश पूजा सामग्री की संपूर्ण सूची

गणेश पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

संपूर्ण गणेश पूजा सामग्री लिस्ट

पूजा शुरू करने से पहले नीचे दी गई आवश्यक सामग्री तैयार रखें।

🪔 मांडणी और स्थापना

चौरंग / पाटा · लाल या कोरा कपड़ा · अक्षत · तांबे / पीतल का कलश · 5 आम या पान के पत्ते · जटा नारियल

🌸 पवित्र वस्तुएं और श्रृंगार

21 दूर्वा · जास्वंद के फूल · हल्दी · कुमकुम · अष्टगंध · चंदन · अक्षत · कपास की वस्त्रमाल · जनेऊ

🌿 5 प्रकार का विडा साहित्य

खारीक · सूखा नारियल (खोबरं) · हल्दी की गांठ (हळकुंड) · बादाम · साबुत सिक्का / सुपारी

🍬 स्नान और नैवेद्य

शुद्ध जल · गंगाजल · पंचामृत · 21 मोदक · गुड़-नारियल · लड्डू · 5 प्रकार के मौसमी फल

🪔 आरती और अन्य सामग्री

दो समई (दीपक) · शुद्ध देसी घी · तेल · धूप · कपूर · माचिस · घंटी · शंख

💡 तैयारी की टिप: सभी छोटी सामग्री को एक या दो थालियों में पहले से व्यवस्थित कर लें, ताकि पूजा के दौरान बार-बार उठना न पड़े।

गणपति पूजा मांडणी कैसे करें?

पारंपरिक मराठी घरों में गणपति बाप्पा की मांडणी केवल मूर्ति रखने तक सीमित नहीं होती। चौरंग, कलश, सुपारी गणपति, विडा साहित्य, दीपक, शंख, घंटी, फूल और नैवेद्य को भी श्रद्धा के साथ व्यवस्थित किया जाता है।

1

दिशा और चौकी की सफाई

सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा की जगह को साफ करें और गंगाजल या गोमूत्र का छिड़काव करके पवित्र करें। चौरंग या पाटे के चारों ओर सुंदर रांगोळी बनाएं और चौकी पर नया लाल या कोरा कपड़ा बिछाएं।

💡 ध्यान रखें: मांडणी करते समय बाप्पा की मूर्ति का मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर रखने की परंपरा बताई गई है।

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कलश स्थापना — बाप्पा के दाईं ओर

चौकी पर चावल का स्वस्तिक बनाएं या अक्षत की ढेरी लगाएं। बाप्पा के दाईं ओर तांबे या पीतल का कलश स्थापित करें। कलश में जल, हल्दी-कुमकुम, अक्षत, सिक्का, फूल और एक दूर्वा डालें। कलश के मुख पर 5 आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर शेंडी ऊपर की ओर रखते हुए जटा वाला नारियल स्थापित करें। कलश पर हल्दी-कुमकुम की बिंदी लगाएं।

💡 ध्यान रखें: कलश को पूजा मांडणी का शुभ और पवित्र हिस्सा माना जाता है, इसलिए इसे साफ पात्र में श्रद्धापूर्वक स्थापित करें।

3

सुपारी गणपति की स्थापना

मुख्य मूर्ति के दाईं ओर या ठीक सामने दो पान के पत्ते एक के ऊपर एक रखें। उन पर थोड़े अक्षत रखें और एक सुपारी को गणपति के प्रतीक के रूप में स्थापित करें। घर की परंपरा के अनुसार देवघर की छोटी गणेश मूर्ति का भी उपयोग किया जा सकता है।

💡 ध्यान रखें: यह छोटी स्थापना घर की पारंपरिक मांडणी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।

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बाप्पा की स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा

“ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करते हुए अक्षत के आसन पर मुख्य गणपति मूर्ति को अत्यंत श्रद्धा के साथ विराजमान करें। भगवान गणेश का आवाहन करें और प्रार्थना करें कि बाप्पा आपके घर में पधारें और अपनी कृपा बनाए रखें।

💡 ध्यान रखें: मूर्ति स्थापित करने के बाद अनावश्यक रूप से उसे इधर-उधर न हटाएं।

ॐ गं गणपतये नमः

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

5

स्नान, वस्त्र और जनेऊ अर्पित करें

बाप्पा को दूर्वा की सहायता से पंचामृत और फिर शुद्ध जल का प्रतीकात्मक स्नान कराएं। इसके बाद जनेऊ और कपास की वस्त्रमाल अर्पित करें।

💡 ध्यान रखें: यदि आपकी मूर्ति मिट्टी की या इको-फ्रेंडली है, तो उस पर अधिक पानी डालने के बजाय प्रतीकात्मक रूप से जल अर्पित करना बेहतर है।

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तिलक, फूल, दूर्वा और पत्री पूजा

गजानन के मस्तक पर अष्टगंध, चंदन, कुमकुम और हल्दी का तिलक लगाएं। इसके बाद लाल जास्वंद के फूल और 21 दूर्वा अर्पित करें। गणेश चतुर्थी की पारंपरिक पूजा में 21 प्रकार की पत्री अर्पित करने की परंपरा भी बताई जाती है।

💡 ध्यान रखें: गणेश चतुर्थी की पारंपरिक पूजा में 21 प्रकार की पत्री अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है। पत्री अपनी पारिवारिक या स्थानीय परंपरा के अनुसार अर्पित करें।

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विडा साहित्य और नैवेद्य अर्पित करें

बाप्पा के सामने 5 प्रकार के फल रखें। दो पान के पत्तों पर खारीक, सूखा नारियल, हल्दी की गांठ, बादाम और सुपारी या सिक्का रखकर पारंपरिक विडा तैयार करें। इसके बाद 21 मोदक, गुड़-नारियल का मिश्रण और लड्डू का नैवेद्य अर्पित करें। पीने के लिए एक छोटे तांबे के पात्र में जल रखें।

💡 ध्यान रखें: भोग लगाते समय परिवार के सभी सदस्य श्रद्धा से भगवान गणेश का ध्यान कर सकते हैं।

8

संध्या महा आरती

शाम के समय परिवार के सभी सदस्य एकत्रित हों। घंटी बजाते हुए कपूर और घी के दीपक से गणपति बाप्पा की महा आरती करें। “सुखकर्ता दुखहर्ता” और “जय गणेश देवा” जैसी आरतियां गाएं।

💡 ध्यान रखें: आरती के बाद पुष्पांजलि अर्पित करें और पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें। अंत में सभी को मोदक और प्रसाद वितरित करें।

पूजा मांडणी का आसान क्रम

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बाप्पा

चौरंग के मध्य में

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कलश

बाप्पा के दाईं ओर

🌿

पूजा सामग्री

फूल, दूर्वा, नैवेद्य आदि व्यवस्थित रखें

संध्या महा आरती

14 सितंबर 2026 को शाम के समय परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होकर बाप्पा की महा आरती करें। कपूर और घी के दीपक से आरती करते हुए “सुखकर्ता दुखहर्ता” और “जय गणेश देवा” जैसी आरतियां गाएं।

आरती के बाद पुष्पांजलि → क्षमा प्रार्थना → प्रसाद वितरण

गणपति बाप्पा मोरया! 🙏

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q: गणेश चतुर्थी 2026 कब मनाई जाएगी?

A: गणेश चतुर्थी 2026 में 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।

Q: गणपति स्थापना का मुख्य शुभ मुहूर्त क्या है?

A: मुंबई के लिए 14 सितंबर 2026 को मुख्य मध्याह्न पूजा मुहूर्त सुबह 11:20 बजे से दोपहर 01:48 बजे तक है। अन्य प्रमुख शहरों के स्थानीय समय ऊपर दिए गए हैं।

Q: क्या अलग-अलग शहरों में गणेश पूजा का मुहूर्त अलग होता है?

A: हाँ। गणेश पूजा का मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय समय को प्राथमिकता दें।

Q: गणपति की पूजा मांडणी में कलश कहां रखें?

A: दिए गए पारंपरिक मांडणी के अनुसार कलश को बाप्पा के दाईं ओर स्थापित किया जाता है।

श्रद्धा से करें बाप्पा की स्थापना

गणपति बाप्पा की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और भक्ति है। पारंपरिक मांडणी के अनुसार चौकी, कलश, दूर्वा, पत्री, नैवेद्य और आरती की व्यवस्था करके परिवार के साथ गणेशजी का स्वागत करें।

भगवान श्री गणेश आपके घर-परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल लेकर आएं और सभी विघ्नों को दूर करें।

गणपति बाप्पा मोरया!
मंगलमूर्ति मोरया! 🙏

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