गौरी गणपति 2026: पूजा विधि और सामग्री
गौरी आवाहन, मुख्य पूजन, नैवेद्य, हल्दी-कुंकू और विसर्जन की संपूर्ण जानकारी
गौरी गणपति 2026: माता के स्वागत की तैयारी
गौरी गणपति उत्सव महाराष्ट्र की एक सुंदर और पारंपरिक धार्मिक परंपरा है। गणपति बाप्पा के आगमन के बाद कई परिवारों में गौरी माता का घर में स्वागत किया जाता है और श्रद्धापूर्वक पूजा, श्रृंगार, नैवेद्य, आरती तथा विदाई की जाती है।
इस वर्ष गौरी आवाहन 17 सितंबर 2026, मुख्य गौरी पूजन 18 सितंबर 2026 और गौरी विसर्जन 19 सितंबर 2026 को होगा।
इस गाइड में आपको गौरी गणपति की तिथियां, पूजा सामग्री, आवाहन विधि, स्थापना, श्रृंगार, नैवेद्य, हल्दी-कुंकू, आरती और विसर्जन की जानकारी आसान भाषा में मिलेगी।

गौरी गणपति पूजा और स्थापना
गौरी गणपति 2026: महत्वपूर्ण तिथियां
माता का घर में स्वागत और स्थापना।
श्रृंगार, नैवेद्य, हल्दी-कुंकू और मुख्य पूजा।
अंतिम पूजा, आरती और माता की विदाई।
गौरी पूजा के मुहूर्त और विधि में स्थान तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। पूजा के समय के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।
गौरी गणपति क्यों मनाया जाता है?
गौरी को सामान्यतः भगवान गणेश की माता पार्वती के स्वरूप से जोड़ा जाता है। महाराष्ट्र के कई परिवारों में गौरी को घर की अतिथि या मायके आई हुई देवी के रूप में प्रेमपूर्वक आमंत्रित किया जाता है।
गौरी का आगमन घर में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और मंगल का प्रतीक माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में गौरी की स्थापना और पूजा की परंपरा अलग हो सकती है।
कई परिवारों में दो गौरी स्थापित करने की परंपरा है, जबकि कुछ परिवारों में एक ही गौरी की पूजा की जाती है। कुछ महाराष्ट्रियन परंपराओं में गौरी को महालक्ष्मी के रूप में भी पूजा जाता है।
संपूर्ण गौरी पूजा सामग्री
पूजा से पहले आवश्यक सामग्री तैयार कर लें। सामग्री आपके परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।
🪔 स्थापना और पूजा
गौरी माता का स्वरूप, पूजा चौकी, लाल या पीला कपड़ा, कलश, नारियल, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, चंदन, सिंदूर, मौली, पान, सुपारी, फूल, फूलों की माला, फल, दक्षिणा।
🌸 गौरी श्रृंगार
साड़ी, चुनरी, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, काजल, हार, मंगलसूत्र, नथ, कर्णफूल, पायल, गजरा और अन्य पारंपरिक आभूषण।
🍚 नैवेद्य
पुरणपोळी, भाजी, वरण-भात, पोळी, लड्डू, खीर, मिठाई, फल, पंचपक्वान्न और परिवार की पारंपरिक भाजियां।
🪔 आरती और अन्य सामग्री
दीपक, घी, तेल, रुई की बाती, कपूर, अगरबत्ती, धूप, माचिस, घंटी, आरती की थाली, जल पात्र।
💡 तैयारी की टिप: छोटी सामग्री को एक या दो थालियों में पहले से व्यवस्थित कर लें, ताकि पूजा के दौरान बार-बार उठना न पड़े।
गौरी आवाहन की तैयारी
17 सितंबर 2026 को गौरी माता के आवाहन से पहले घर और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा की जगह पर चौकी रखें और उसके ऊपर साफ कपड़ा बिछाएं। मुख्य द्वार और पूजा स्थान पर रंगोली तथा तोरण से सजावट की जा सकती है।
यदि आपके परिवार में गौरी के आगमन के लिए विशेष पदचिह्न या स्वागत की परंपरा है, तो उसी के अनुसार माता के आने का मार्ग तैयार करें। इसके बाद कलश, श्रृंगार और पूजा सामग्री को व्यवस्थित करके रखें।
गौरी आवाहन और पूजा विधि
गौरी आवाहन का मुख्य भाव माता का घर में स्वागत करना है। पूजा की विधि में क्षेत्र और परिवार के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए नीचे दी गई सामान्य विधि को अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अपनाएं।
पूजा स्थान की शुद्धि
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें और अपनी परंपरा के अनुसार गंगाजल या स्वच्छ जल का छिड़काव करें। चौकी पर साफ लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और पूजा स्थान को रंगोली तथा फूलों से सजाएं।
💡 ध्यान रखें: यदि आपके परिवार में गौरी के आगमन के लिए विशेष पदचिह्न या स्वागत की परंपरा है, तो उसी के अनुसार पूजा स्थान और घर का मार्ग तैयार करें।
गौरी माता का स्वागत और आवाहन
17 सितंबर 2026 को अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार गौरी माता का घर में स्वागत करें। माता को श्रद्धापूर्वक पूजा स्थान तक लाएं और उनके आगमन को मंगल भाव से स्वीकार करें।
💡 ध्यान रखें: कई परिवारों में गौरी के स्वागत के समय पारंपरिक गीत, आरती और मंगलगान किए जाते हैं।
गौरी माता की स्थापना
सजाई हुई चौकी या निर्धारित स्थान पर गौरी माता को स्थापित करें। यदि आपके परिवार में दो गौरी स्थापित करने की परंपरा है, तो दोनों को अपनी पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार रखें।
💡 ध्यान रखें: गौरी के स्वरूप और स्थापना की दिशा या व्यवस्था के लिए अपने परिवार में चली आ रही परंपरा को प्राथमिकता दें।
कलश स्थापना
कलश में स्वच्छ जल भरें। उसमें अपनी परंपरा के अनुसार अक्षत, सुपारी, हल्दी आदि रखें। कलश के ऊपर नारियल रखें और माता के पास श्रद्धापूर्वक स्थापित करें।
💡 ध्यान रखें: कलश को पूजा की मांडणी में शुभ और पवित्र स्थान दिया जाता है।
गौरी माता का श्रृंगार
गौरी माता को साड़ी या चुनरी पहनाएं और अपनी परंपरा के अनुसार बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, चूड़ियां, हार, मंगलसूत्र, नथ, कर्णफूल, पायल, गजरा तथा अन्य आभूषण अर्पित करें।
💡 ध्यान रखें: हर परिवार में श्रृंगार की सामग्री अलग हो सकती है। अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार माता का श्रृंगार करें।
पूजा और उपचार
हल्दी, कुमकुम, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें। इसके बाद फल, नैवेद्य और अन्य पारंपरिक पूजन सामग्री माता को अर्पित करें। परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
💡 ध्यान रखें: पूजा के दौरान श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें। किसी एक क्षेत्र की विधि को सभी परिवारों के लिए अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं है।
नैवेद्य अर्पित करें
माता को अपनी पारंपरिक रसोई में बनाए गए भोजन, मिठाई, फल और अन्य नैवेद्य अर्पित करें। महाराष्ट्र के कई परिवारों में गौरी के मुख्य पूजन दिवस पर विशेष भोजन और विभिन्न प्रकार की भाजियां बनाने की परंपरा है।
💡 ध्यान रखें: यदि आपके परिवार में 16 भाजियों का नैवेद्य बनाने की परंपरा है, तो उसी के अनुसार तैयारी करें।
हल्दी-कुंकू और आरती
मुख्य पूजा के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार हल्दी-कुंकू का आयोजन करें। शाम को परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होकर गौरी माता की आरती करें और अंत में प्रसाद वितरित करें।
💡 ध्यान रखें: आरती के बाद माता से परिवार के सुख, शांति, स्वास्थ्य और मंगल की प्रार्थना करें।
मुख्य गौरी पूजा — 18 सितंबर 2026
18 सितंबर 2026, शुक्रवार को गौरी माता का मुख्य पूजन करें। सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को व्यवस्थित करें।
पूजा स्थान की शुद्धि करें, दीपक जलाएं, गणेश जी का स्मरण करें, गौरी माता का ध्यान करें, संकल्प लें, माता को वस्त्र और श्रृंगार अर्पित करें, हल्दी-कुमकुम-चंदन-अक्षत और फूल चढ़ाएं, फल एवं नैवेद्य अर्पित करें, आरती करें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार हल्दी-कुंकू का आयोजन करें।
गौरी माता को क्या नैवेद्य चढ़ाएं?
गौरी पूजन में नैवेद्य का विशेष स्थान है और महाराष्ट्र में अलग-अलग परिवारों में अलग-अलग पारंपरिक भोजन बनाए जाते हैं।
पुरणपोळी, भाजी, वरण-भात, पोळी, लड्डू, खीर, मिठाई, फल और पंचपक्वान्न जैसे पारंपरिक भोजन बनाए जा सकते हैं। आपके घर में जो भोजन परंपरागत रूप से माता को अर्पित किया जाता है, उसे प्राथमिकता दें।
कुछ महाराष्ट्रियन परंपराओं में गौरी के मुख्य पूजन दिवस पर 16 प्रकार की भाजियों का नैवेद्य तैयार करने की परंपरा भी मिलती है। यह परंपरा क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदल सकती है।
🌿 16 भाजियों की परंपरा
गौरी पूजन के समय कई परिवारों में अलग-अलग प्रकार की सब्जियां बनाकर माता को नैवेद्य अर्पित किया जाता है। यह परंपरा प्रकृति, अन्न और समृद्धि के प्रति कृतज्ञता का भाव भी व्यक्त करती है।
यदि आपके परिवार में 16 भाजियों की परंपरा है तो उसी के अनुसार सामग्री तैयार करें। यदि यह परंपरा आपके घर में नहीं है, तो केवल इसी कारण से इसे अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं है।
पूजा में श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें।
हल्दी-कुंकू की परंपरा
गौरी पूजन के दिन कई घरों में विवाहित महिलाओं को हल्दी-कुंकू के लिए आमंत्रित किया जाता है। महिलाएं माता के दर्शन करती हैं और एक-दूसरे को हल्दी-कुंकू लगाकर मंगलकामना करती हैं।
हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल, सुपारी, नारियल और अपनी सुविधा के अनुसार छोटी भेंट दी जा सकती है। यह आयोजन परिवार और समाज में प्रेम, सम्मान और सौहार्द का सुंदर माध्यम बनता है।
गौरी माता की आरती
मुख्य पूजा के अंत में गौरी माता की आरती करें। अपनी पारिवारिक परंपरा में प्रचलित गौरी आरती, देवी आरती या माता की आरती गा सकते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती में शामिल हों और अंत में माता से सुख, शांति, स्वास्थ्य और मंगल की प्रार्थना करें।
आरती → पुष्प अर्पण → प्रार्थना → प्रसाद वितरण
गौरी विसर्जन 2026
19 सितंबर 2026, शनिवार को गौरी माता की विदाई की जाएगी। विसर्जन से पहले माता की अंतिम पूजा, श्रृंगार, नैवेद्य और आरती करें।
इसके बाद परिवार की ओर से क्षमा प्रार्थना करें और माता से अगले वर्ष पुनः पधारने का निवेदन करते हुए सम्मानपूर्वक विदाई दें।
ध्यान रखें कि गौरी विसर्जन हर परिवार में पानी में मूर्ति विसर्जन के अर्थ में नहीं होता। कई परंपराओं में यह प्रतीकात्मक विदाई या उद्वासन के रूप में किया जाता है। अपने परिवार की परंपरा का पालन करें।
यदि आपकी गौरी की मूर्ति विसर्जन योग्य है, तो पर्यावरण-अनुकूल तरीके और स्थानीय नियमों के अनुसार विसर्जन करें।
गौरी गणपति 2026 — तीन दिनों की आसान योजना
🌺 17 सितंबर — गौरी आवाहन
घर और पूजा स्थान की सफाई, रंगोली और सजावट, गौरी माता का स्वागत, कलश स्थापना, माता की स्थापना, श्रृंगार, पूजा, नैवेद्य और आरती।
🌸 18 सितंबर — मुख्य गौरी पूजन
सुबह पूजा, माता का श्रृंगार, मुख्य पूजन, नैवेद्य, पारंपरिक 16 भाजियां यदि आपके परिवार में परंपरा हो, हल्दी-कुंकू, आरती और प्रसाद।
🪔 19 सितंबर — गौरी विदाई
अंतिम पूजा, नैवेद्य, आरती, क्षमा प्रार्थना, माता से अगले वर्ष पुनः आने का निवेदन और पारिवारिक परंपरा के अनुसार विसर्जन या उद्वासन।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q: गौरी गणपति 2026 कब है?
A: 2026 में गौरी आवाहन 17 सितंबर, मुख्य गौरी पूजन 18 सितंबर और गौरी विसर्जन 19 सितंबर को होगा।
Q: गौरी आवाहन 2026 में किस दिन होगा?
A: गौरी आवाहन गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को होगा।
Q: गौरी पूजा 2026 कब है?
A: मुख्य गौरी पूजन शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को होगा।
Q: गौरी विसर्जन 2026 कब है?
A: गौरी विसर्जन शनिवार, 19 सितंबर 2026 को होगा।
Q: क्या हर घर में दो गौरी स्थापित की जाती हैं?
A: नहीं। यह क्षेत्र और परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है। कुछ परिवारों में दो गौरी और कुछ परिवारों में एक गौरी की पूजा की जाती है।
Q: क्या गौरी को महालक्ष्मी भी कहा जाता है?
A: कई महाराष्ट्रियन परिवारों और क्षेत्रों में गौरी को महालक्ष्मी के रूप में भी पूजा जाता है। हालांकि स्वरूप और नाम की परंपरा क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है।
Q: क्या गौरी पूजा में 16 भाजियां जरूरी हैं?
A: 16 भाजियों का नैवेद्य कुछ परिवारों और क्षेत्रों की पारंपरिक परंपरा है। इसे हर परिवार के लिए अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए।
Q: क्या गौरी विसर्जन में मूर्ति को पानी में विसर्जित करना जरूरी है?
A: यह गौरी के स्वरूप और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है। कई परंपराओं में गौरी की प्रतीकात्मक विदाई या उद्वासन किया जाता है।
श्रद्धा से करें गौरी माता का स्वागत
गौरी गणपति उत्सव में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, प्रेम और अपनी पारिवारिक परंपरा है। माता का स्वागत करें, उनका श्रृंगार करें, नैवेद्य अर्पित करें, आरती करें और पूरे परिवार के साथ इस पावन पर्व का आनंद लें।
गौरी माता आपके घर में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल लेकर आएं और पूरे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।
जय गौरी माता!
गणपति बाप्पा मोरया! 🙏
स्रोत: 2026 की गौरी आवाहन, पूजा और विसर्जन की तिथियों के लिए Drik Panchang के 2026 मराठी पंचांग और ज्येष्ठा गौरी संबंधी पंचांग जानकारी का संदर्भ लिया गया है। स्थानीय मुहूर्त के लिए अपने शहर के पंचांग को प्राथमिकता दें।