Mata ke dasya ucha gadh par baithemata ke bhajanRajasthani BhajanMarwadi Bhajanराजस्थानी भजनमाता के भजन
दस
या ऊँचा गढ़ पर बैठे वा तो शेखमरू बाळो।
या पर्वतड़ा पर खेले वा तो धणी रखवाळो॥
तो हूँ बैजाणु... सरत माय सुरत कर।
पण सवारू रे घर वो सो ज्ञान बताय॥
या ऊँचा गढ़ पर बैठे...
तो हूँ बैजाणु... एक सौ एक्कीस थारी पायरिया।
पण चढ़ता रे बहुत लागी रे बड़ी बार॥
या ऊँचा गढ़ पर बैठे...
तो हूँ बैजाणु... सवाँ तो मन को थारो मलीदो।
पण करता रे बहुत लागी रे बड़ी बार॥
या ऊँचा गढ़ पर बैठे...
तो हूँ बैजाणु... आजू तो बाजू थारा नगाड़ा।
पण बाजिया रे बहुत बाज्या रे आकराळ॥
या ऊँचा गढ़ पर बैठे...
तो हूँ बैजाणु... आजू तो बाजू थारा चमेली।
पण खुल रही रे बोय चाली रे महेकार॥
या ऊँचा गढ़ पर बैठे...
तो हूँ बैजाणु... आजू तो बाजू थारा टाका।
पण भरिया रे बहुत भर्या रे आकराळ॥
या ऊँचा गढ़ पर बैठे...
तो हूँ बैजाणु... आजू तो बाजू तो चौकी नार की।
पण डरिया रे बहुत डर्या रे आकराळ॥
या ऊँचा गढ़ पर बैठे...
(चाल चेंज)
कोई अड़की खड़की गाय धुलायी, भैंस धुलायी गाँव ठाण।
म्हारा शामा दल का गुड़ल्या छूट्या रे बाँधो ठाण॥
म्हारा शामा दल का गुड़ल्या छूट्या रे बाँधो ठाण॥
कोई नीलो घोड़ो, हरियो बाणो, जीपर बैठे मुगल पठाण।
म्हारा आवलियाँ का फड़क रह्या रे निशाण॥
म्हारा आवलियाँ का फड़क रह्या रे निशाण॥