भजन संग्रह
भक्ति और आध्यात्मिकता से जुड़ने वाले भजन
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भक्ति और आध्यात्मिकता से जुड़ने वाले भजन
"मैया मैं नहीं माखन खायो। भोर भयो गैयन के पीछे, मधुबन मोहि पठायो॥ ग्वाल बाल सब बैठि के मिलकर, सकल मिष्टान खायो। मुझसे कहत चोरी तू कीन्हीं, यह बात कहाँ ..."
"मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई। जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई॥ तात मात भ्रात बंधु, आपनो न कोई। छाड़ि दई कुल की कानि, कहा करिहै कोई॥ संतन ढिग बैठि..."