आरती कुंज बिहारी की - श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

Complete Guide with Video, Lyrics & Meaning

3 सितंबर, 2026
15 मिनट पढ़ने का समय

परिचय और ऐतिहासिक संदर्भ

"आरती कुंज बिहारी की" भगवान श्री कृष्ण की सबसे लोकप्रिय और प्रिय आरतियों में से एक है। "कुंज बिहारी" नाम का अर्थ है "वह जो वृन्दावन के कुंजों (निकुंजों/बगीचों) में विहार करते हैं"।

ऐतिहासिक रूप से यह आरती वृन्दावन के प्रसिद्ध कुंज बिहारी मंदिर (बांके बिहारी जी) से जुड़ी है। यह आरती भगवान कृष्ण के दिव्य रूप, उनके मनमोहक श्रृंगार (वैजयंती माला, कस्तूरी तिलक) और उनकी मधुर लीलाओं का अद्भुत वर्णन करती है।

आरती सुनें (Listen to the Aarti)

आरती कुंज बिहारी की - पूर्ण लिरिक्स

हिंदी में

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

English Transliteration

Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki ॥
Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki ॥

Gale mein baijanti mala,
Bajave murali madhur bala.
Shravan mein kundal jhalkala,
Nand ke anand nandlala.
Gagan sam ang kanti kali,
Radhika chamak rahi aali.
Latan mein thadhe banmali
Bhramar si alak,
Kasturi tilak,
Chandra si jhalak,
Lalit chhavi Shyama pyari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki ॥

Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki ॥

Kanakmaya mor mukut bilasai,
Devata darsan ko tarasain.
Gagan son suman raasi barasai.
Baje murchang,
Madhur mirdang,
Gwaalin sang,
Atul rati gop kumari ki,
Shri Giridhar Krishnamurari ki ॥

Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki ॥

Jahan te prakat bhayi Ganga,
Sakal man harini Shri Ganga.
Smaran te hot moh bhanga
Basi Shiv sees,
Jata ke beech,
Harai agh keech,
Charan chhavi Shri Banwari ki,
Shri Giridhar Krishnamurari ki ॥

Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki ॥

Chamakti ujjwal tat renu,
Baj rahi Vrindavan benu.
Chahun disi Gopi gwaal dhenu
Hansat mridu mand,
Chandani chand,
Katat bhav phand,
Ter sun deen dukhari ki,
Shri Giridhar Krishnamurari ki ॥

Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki ॥
Aarti Kunj Bihari ki,
Shri Giridhar Krishna Murari ki ॥

आरती का विस्तृत अर्थ (Line-by-Line Meaning)

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला... ललित छवि श्यामा प्यारी की।

हम उन कुंजबिहारी श्री कृष्ण की आरती करते हैं, जो गोवर्धन पर्वत धारण करने वाले हैं। जिनके गले में वैजयंती माला है और जो मधुर बांसुरी बजाते हैं। जिनके कानों में कुंडल झिलमिला रहे हैं और जो नंदबाबा के आनंद हैं। जिनका शरीर आकाश के समान श्यामल है और साथ में राधिका जी सुशोभित हैं। लताओं के बीच खड़े वनमाली के घुंघराले बाल भौंरे जैसे, माथे पर कस्तूरी तिलक और मुख पर चंद्रमा सी चमक है।

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं... अतुल रति गोप कुमारी की।

जिनके सिर पर सोने का मोर मुकुट सुशोभित है, जिनके दर्शन के लिए देवता भी तरसते हैं। आकाश से फूलों की वर्षा हो रही है। जहां मुरचंग और मधुर मृदंग बज रहे हैं, और गोपियों के साथ जिनकी अतुलनीय प्रीति है, उन श्री कृष्ण की हम आरती करते हैं।

जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा... हरै अघ कीच।

जिनके चरणों से सबका मन हरने वाली श्री गंगा जी प्रकट हुई हैं, जिनके स्मरण मात्र से मोह भंग हो जाता है। जो गंगा शिव जी के शीश पर जटाओं के बीच बसती हैं और सारे पापों की कीचड़ को धो देती हैं, ऐसे श्री बनवारी के चरणों की हम आरती करते हैं।

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू... टेर सुन दीन दुखारी की।

यमुना तट की उज्ज्वल रेत चमक रही है और वृन्दावन में मधुर बांसुरी बज रही है। चारों दिशाओं में गोपियां, ग्वाले और गाएं हैं। भगवान मंद-मंद मुस्कुरा रहे हैं जैसे चांदनी छिटक रही हो। जो दीनों और दुखियों की पुकार सुनकर उनके भव-बंधन (संसार के कष्ट) काट देते हैं, ऐसे श्री कृष्ण की हम आरती करते हैं।

आरती कब गाएं?

🌅प्रातःकालीन: मंगला आरती के समय, दिन की शुभ शुरुआत के लिए

🪔संध्या आरती: सूर्यास्त के समय, शांति और सकारात्मकता के लिए

🎉जन्माष्टमी: भगवान कृष्ण के प्राकट्य उत्सव पर विशेष रूप से

🌸नियमित पूजा: दैनिक पूजा के समय भी गा सकते हैं

आरती कैसे करें?

  1. 1स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान का ध्यान करें।
  2. 2थाली में घी का दीपक, पुष्प और चंदन सजाएं।
  3. 3पूरी श्रद्धा के साथ खड़े होकर, ताली या घंटी बजाते हुए आरती गाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q: कुंज बिहारी का क्या अर्थ है?

A: "कुंज बिहारी" का अर्थ है 'वह जो वृन्दावन के कुंजों (बगीचों और लताओं के बीच) में विहार (घूमना) करते हैं'। यह भगवान श्री कृष्ण का एक अत्यंत प्रिय नाम है।

Q: जन्माष्टमी पर इस आरती का क्या महत्व है?

A: कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के तुरंत बाद यह आरती गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह भगवान कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति का प्रतीक है।

Q: यह आरती मुख्य रूप से किस मंदिर में गाई जाती है?

A: यह आरती विशेष रूप से वृन्दावन स्थित विश्व प्रसिद्ध 'बांके बिहारी मंदिर' और 'कुंज बिहारी मंदिर' में प्रतिदिन बड़े ही भक्ति भाव से गाई जाती है।

निष्कर्ष

"आरती कुंज बिहारी की" केवल एक गीत नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम की अभिव्यक्ति है। नियमित रूप से इसे गाने से मन की शांति और ठाकुर जी की कृपा प्राप्त होती है।

राधे राधे! जय श्री कृष्ण! 🙏

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